परवेज कुरैशी

रांची । अंजुमन इस्लामिया चुनाव का कार्यकाल पूरा हो गया है। विवाद मुक्त, पारदर्शी तरीके से अंजुमन इस्लामिया चुनाव 2025 का चुनाव कराने की जिम्मेदारी मुफ्ती अनवर कासमी को दी गई है। उन्हें चुनाव संयोजक नियुक्त किया गया है । चुनाव संयोजक मुफ्ती अनवर कासमी ने अंजुमन इस्लामिया बायोलॉजी के अनुसार फिर से नये सिरे से मतदाताओं से आवेदन मांगे हैं, 30 अक्टूबर 2025 तक अंतिम समय दिया गया है। अब तक कुछ लोगों ने ही अपने-अपने संस्था, पंचायतें, मस्जिद, मदरसा, संगठन, एनजीओ से फिर से मतदाता बनने के लिए अपने नाम का आवेदन जमा कर दिए हैं , बावजूद इसके कई लोगों ने अब तक इस प्रक्रिया से बाहर हैं। समय काम है, इसको लेकर अंजुमन इस्लामिया के निवर्तमान अध्यक्ष हाजी मुख्तार , झारखंड रफ्ता हज कमेटी , मुस्लिम एक्शन कमेटी, जमीअतुल मोमिनन सहित कई समाजिक संगठनों ने अंजुमन चुनाव संयोजक को लिखित और मौखिक मांग किया है, कि सितंबर, अक्टूबर में पर्व त्यौहार रहा है, लोगों ने अपने संस्थान, संगठन, मदरसा, मस्जिद, से मतदाता बनाने के लिए सूची व्यस्तता के कारण जमा नहीं कर पाये हैं, इसके लिए कुछ समय और दिया जाए, क्योंकि 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस भी है इसको भी ध्यान में रखा जाये। इन सबको देखते हुए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर को आगे बढ़ाने की मांग किया गया है।

फर्जी मतदाता बनाने में जुटे लोग

अंजुमन इस्लामिया चुनाव 2025 को लेकर जो सूचनाएं मिल रही है, इसमें कई ऐसे लोग हैं जो पूर्व में भी उसे फर्जी मतदाता सूची में नाम दाखिल करने की प्रक्रिया अपनाने पर उसका पूरजोर विरोध हुआ था और वैसे फर्जी लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया गया था, बावजूद इसके वहीं गिने चुने लोग ने पीछे के दरवाजे से 2022 में इंट्री कर चुके थे, और फिर से 2025 में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपना रहें हैं, ऐसे फर्जी लोगों के विरोध में एक बार फिर लोग
आक्रोशित नजर आ रहे हैं।

फर्जी की ऐसे करे पहचान

कोई भी संगठन, पंचायत,मस्जिद, मदरसा, स्कूल , कॉलेज, एनजीओ सहित अन्य संस्थान जिसे अंजुमन इस्लामिया के 1917-1942 /1978 बायोलॉजी के अनुसार मान्य है, वैसे लोग अगर आवेदन देते हैं, तो उसकी पहचान करने के लिए उसके आवेदन का लेटर पैड रजिस्टर्ड है, या लेटर पैड में पिछले कम से कम 5 साल पहले का रिकॉर्ड है जो हाल में अपडेट किया है, इसकी कोई तस्वीर,पेपर कटिंग है, जिस बात को साबित करता है, कि वह कम से कम लगातार 2013 से 2025 सितंबर तक काम किया है। ऐसे भी संगठने हैं जो किसी बड़े रजिस्टर्ड संस्थान रिफरेंस से संचालित होता है, उसे तो मान्यता है, लेकिन ऐसे भी संस्थान है , जिसका कोई रिफरेंस है ही नहीं, तो उस मान्यता नहीं दिया जाना चाहिए और कम से कम जिस क्षेत्र के लोग हैं, उस क्षेत्र के कम से कम 25 लोगों की टीमें बनाई जाए जो यह पता लगा सके कि ये संस्थान है या नहीं ? मतदाता सूची को सर्वजनिक भी पहले की तरह किया जाए। जैसा कि 2018 वाले चुनाव के समय किया गया था, तभी आप फर्जी मतदाताओं की पहचान कर सकेंगे।

ऐसे बढ़ते चले गए मतदाताओं की संख्या

2013 से पहले अंजुमन इस्लामिया रांची की स्थिति पर बात नहीं करते हुए हम 29 सितम्बर 2013 चुनाव से लेकर 2022 तक की मतदाता सूची पर बात करेंगे। इस बीच मतदाताओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, मतदाताओं की संख्या तो बढ़ी है, संगठन तो बढ़ाई गई हैं, लेकिन क्या उन संगठनों को आप समाज हित में लगातार काम करते कहीं देखा है, नहीं ? तो फिर उन्हें कैसे मौका दिया गया? यह सबसे बड़ा सवाल है। अगर आप देखेंगे तो 29 सितंबर 2013 चुनाव का मतदाता सूची जिसमें लगभग 759 मतदाताओं की संख्या थी और इसमें इबरार अहमद पहली बार अध्यक्ष पद पर चुनाव जीत कर आए थे और उन्हें करीब 341 वोट मिले थे, वहीं 22 अप्रैल 2018 में जब दूसरी बार अंजुमन इस्लामिया रांची चुनाव हुआ तो इसमें 759 मतदाताओं से बढ़कर 938 मतदाताओं की संख्या हो गई, जमकर विवाद भी हुए थे, कई लोग हटाए भी गए थे, बावजूद इसके करीब 938 मतदाताओं में 827 ही मत डाल गये थे, इस चुनाव में इबरार अहमद को करीब 422 मत प्राप्त हुए थे, लेकिन 29 अगस्त 2022 आते-आते मतदाताओं की संख्या 938 से बढ़कर सीधे 1635 तक पहुँच गई जो जांच का विषय है। लेकिन जो मतदान हुए थे वे मात्र 1388 लोगों ने मतदान किया था और इस तीसरे चुनाव में हाजी मुख्तार को 781 मत प्राप्त हुए थे और वे अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे, वहीं दो बार अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष रहे इबरार अहमद को तीसरी बार मात्र 581 मत ही मिले थे,इस तरह से वे दूसरे नंबर पर रहे। कहने का मतलब यही है कि जब 2013 में जो मतदाता थे, उन्होंने जो आवेदन अपने लेटर पेड पर दिए थे, उस लेटर पैड का पिछले 2023- 2024- 2025 में क्या समाजहित में काम किया है ये देखने जानने की जरूरत है ।

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