
*जमशेदपुर सीरियल मर्डर का किया था उदभेदन
शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए समाज के बीच करते हैं सराहनीय कार्य*
परवेज कुरैशी , प्रभात मंत्र ब्यूरो रांची
रांची। 20 मई 2023 से लोअर बाजार थाना में पदस्थापित पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी दयानंद के चेहरे पर मुस्कान है और यह हर्ष इसलिए है कि इस पल के लिए उन्हें 31 सालों तक पुलिस सेवा में बेहतर कार्य करने के इंतजार के बाद मिला है। दयानंद को उनके कार्यकुशलता की बदौलत पुलिस उपाधीक्षक पद पर उन्हें प्रोन्नति मिल गई है, शुक्रवार 11 जुलाई 2025 को श्रावण के पवित्र महीने की शुरुआत हुई इसी दिन रांची समाहरणालय बी ब्लॉक में पुलिस उप महानिरीक्षक सह वरीय पुलिस अधीक्षक चंदन सिन्हा के कार्यलय में पुलिस महानिरीक्षक मनोज कौशिक, पुलिस उप महानिरीक्षक सह वरीय पुलिस अधीक्षक चंदन सिन्हा, नगर पुलिस अधीक्षक अजीत, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने उन्हें बैच लगाकर सम्मानित किये। दयानंद किसी भी थाना पर रहे हैं तो उन्होंने अपराध पर नियंत्रण के साथ साथ कुछ मामलों में वे दयालू भी रहे हैं,साथ ही विधि व्यवस्था बनाये रखना सबसे बड़ा चैलेंज होता है, इसलिए पुलिस निरीक्षक दयानंद न सिर्फ अपने थाना क्षेत्र, बल्कि आसपास के सभी थाना क्षेत्रों के सभी समाजिक व्यक्तियों के बीच समन्वय बनाकर काम करते हैं, जिनका लाभ भी देखने को मिला कि ये जिस थाना में रहे उस क्षेत्र में विधि व्यवस्था बिगडने नहीं दिये। इतना ही नहीं थाना के मुंशी से लेकर कनीय पुलिस कर्मियों का आमजनता के साथ व्यवहार कैसा होना चाहिए इसकी भी नसीहते देते रहते हैं, ताकि आमजनता अपनी शिकायत लेकर जब थाना पहुंचे तो उन्हें परेशान नहीं होना पड़े। साथ ही जब नये भारतीय न्याय संहिता कानून 2023 लागू हुआ तो उन्हें ही लगातार कई पुलिसकर्मियों को बीएनएस की नई धाराओं के बारे में प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई और उसने पूरा भी किया, कैसे एफआईआर दर्ज करना है किस मामले में कौन सा धारा लगेगा यह बताने का काम किया, इस बीच ऐसे भी एफआईआर दर्ज हुए हैं जिस पर वे त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल भेजने का रिकॉर्ड हैं, कुछ मामले लंबित हैं , जिसे पूरा करना इनके लिए चैलेंजिग है, पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा ऐसी भी उम्मीदें भुक्तभोगियों ऐसे थानेदार से रहती है।
दयानंद का परिवार:
दयानंद मूल रूप से झारखंड के पलामू के रहने वाले हैं, उनके पिता स्वर्गीय रामचरित्र सिंह , माता स्वर्गीय शांति देवी , पिता स्वास्थ्य विभाग में सरकारी कर्मचारी थे और माँ गृहिणी थीं, पत्नी गृहिणी हैं, दो बच्चे 1 बेटी और 1 बेटा है, बेटी दिल्ली में एमबीए कर रही है।
दयानंद कैसे आए पुलिस सेवा में:
दयानंद की प्रारंभिक शिक्षा अविभाजित बिहार के पलामू में हुआ और स्नातक मारवाड़ी कॉलेज रांची से करने के बाद रोजगार के तलाश में जुट गए , ये वह दौर था जब बिहार सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव नौकरियों का बौछार लगा दिये थे, इसी दौरान पुलिस बहाली भी निकाली गई थी, जिसमें 23 वर्षीय दयानंद कूद पड़े और सफल हुए सब इंस्पेक्टर के पद से अपनी सेवा की शुरूआत की। दयानंद की पहली पोस्टिंग बिहार के बेगूसराय जिला में हुई और यहाँ जिला के विभिन्न थानों में काम किए। इस दौरान बेगूसराय के शहर कमालपुर थाना में सबसे चर्चित घटना घटी थी जिसकी चर्चा आज भी होती है और आगे भी होगी , रहस्यमय तरीके से एक ही परिवार के तीन बच्चे गायब हो गए और यह तीनों बच्चे को जमीन की सुरंग के अंदर रखा गया था, जो पूरी तरह से ब्लाइंड केस था और उस दौर में ना मोबाइल था और ना ही सीसीटीवी कैमरा, ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह का केस का उदभेदन करना अपने आप में काबिले तारीफ है। इसके बाद लखीसराय के थाना में भी रहे और 15 नंवबर 2000 को बिहार से झारखंड अलग हुआ , तब 2004 के आसपास झारखंड में पहली पोस्टिंग कोयलांचल की नगरी धनबाद में एसटीएफ के पद पर हुई , करीब 6 साल जगुआर के पद पर काम किये, लेकिन चर्चा में तब आए जब जमशेदपुर जिला के थाना में चार्ज लिए और आज भी चर्चा में रहते हैं। 2017 -18 में रांची जिला के सदर थाना रहे जब जमीन माफियाओं का बोलबाला था, जमीन घोटाला संजीव बिल्डीकाॅन जयंत नंदनी वगैरह का मामला प्रकाश में आया था, इसके बाद सिमडेगा चले गए और फिर बीस मई 2023 में रांची के लोअर बाजार थाना में पद पदस्थापित हुए , यहाँ चार्ज लिये ही थे कि इनके थाना क्षेत्र में गुरुद्वारा के पास एक बाइक सवार कबाडी करोबारी के साथ लाखों रुपए की लूट दिन के उजाले में हो गई, इस घटना ने सवाल तो उठाये लेकिन थाना के पुराने कनीय पुलिस अगर मेहनत करते तो सवाल नहीं उठता और समय रहते उदभेदन हो जाता, लेकिन आगे इस तरह की घटना नहीं हो थाना प्रभारी ने पूरा ध्यान रखा, अभी फिलहाल इसी लोअर बाजार थाने में कार्यरत हैं।
चर्चित घटनाओं का किया खुलासा:
बता दें कि एक थाना प्रभारी के क्षेत्र में कई घटनाएं होती है और उसका उदभेदन कर अभियुक्तों को जेल भेजना और समय पर गवाही दिलाने से लेकर सजा दिलाने तक मेहनत करनी होती है। ऐसे समय में लूट, छीनताई, चोरी रोकना एक चैलेजिंग होता है, इसके अलावा दुष्कर्म, हत्या, नशा पर अंकुश लगाना, प्रतिबंधित चिजों पर सख्ती रखना आदि। ऐसे में कुछ चर्चित घटनाओं का समय पर बिना किसी नुकसान का उदभेदन करना ही थानेदार की सफलता है और कुछ मामले हैं जो चर्चित रहे हैं और पुलिस उदभेदन करने में सफलता पाई है।
*जमशेदपुर सीरियल मर्डर में सिपाही की गिरफ्तारी:
- पुलिस निरीक्षक दयानंद जब बिहार के बेगूसराय जिले में शहरकलामपुर थाना में थे तब इस थाना क्षेत्र के एक गाँव से जियाउद्दीन नामक व्यक्ति के तीन बच्चे रहस्यमई तरीके से उसका अपहरण हो गया। उन तीनों बच्चों को गांव के ही सुनसान क्षेत्र की एक खेत की जमीन के अंदर सुरंग बनाकर रखा गया था , वहां से तीनों को सकुशल बरामद कर लिया गया था तब जब मोबाइल, सीसीटीवी कैमरे का जमाना नहीं था। वहीं 2013-15 में जब जमशेदपुर क्राइम का इतिहास लिख रहा था, लगातार घटनाएं घट रही थी और सीरियल मर्डर अपने आप उरूज पर था , ऐसी विषम परिस्थितियों में विधि व्यवस्था कंट्रोल रखना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चैलेंज थी, इस विषम परिस्थितियों में सरकार व वरीय पुलिस पदाधिकारी को राहत तब मिली जब सीरियल मर्डर पर विराम लगा दिये, इस सीरियल मर्डर केस का न सिर्फ उदभेदन किये बल्कि इस घटनाक्रम में शामिल बिहार के क्रिमिनल्स की गिरफ्तारी हुई, इतना ही नहीं इस पूरे घटनाक्रम को सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई थी जिसमें एक सिपाही भी शामिल था उसकी भी गिरफ्तारी हुई , तब जाकर सीरियल मर्डर में पूर्णविराम लगा और न सिर्फ सरकार, पुलिस पदाधिकारियों बल्कि आमजनता भी सुकुन की सांस लेने लगे। इसके बाद 19 जनवरी 2017 से फरवरी 2019 तक में जब सदर थाना क्षेत्र में प्रभारी थे, जमीन माफियाओं का बोलबाला था इस कंट्रोल करना और इसी दौरान सदर थाना क्षेत्र के एक नाबालिक बच्ची गायब हो गई थी और दो दिन तक उसका कोई पता नहीं चला था, तब आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता ने फोन से निर्देश दिए थे , फोन आने के करीब 8 घंटा बाद ही उस बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया, दरअसल जिस बच्ची का अपहरण हुआ था उस बच्ची की अपहरण की जानकारी मुंशी ने दिया ही नहीं था, जिस कारण से उदभेदन होने में देरी हो रही थी। बता दें कि कुछ ऐसे भी मामले का उदभेदन किये हैं जैसे नामकुम थाना क्षेत्र के मौलाना आजाद कॉलोनी के मुख्य चौक पर एक युवक की चाकु गोदकर हत्या कर दी गई थी , इस हत्या में शामिल उस युवक की गिरफ्तारी सदर थाना क्षेत्र से थाना प्रभारी दयानंद ने किया था और उस गिरफ्तार युवक ने तत्कालीन डीएसपी विकासचंद्र श्रीवास्तव को बताया था कि ₹500 में उसे हथियार दिया जाता था अपराध करने के लिए, एक सफेद पोशाक वाले जमीन दलाल का नाम सामने आया था, हालांकि बाद में उसका लोअर बाजार थाना क्षेत्र 6 मार्च 2017 में उसकी हत्या हो गई थी। शहीद अल्बर्ट एक्का चौक के आसपास एक धार्मिक स्थल को बिना किसी शोर शराबा के एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया था, इसके लिए दयानंद के कार्यों की जितनी सरहाना की जाए कम है। सदर अस्पताल से एक नवजात शिशु की चोरी हो गई थी इस घटना में शहर में लगे दो सौ से अधिक सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से नवजात शिशु को सकुशल बरामद किया,वहीं जून 2025 में उसी सदर अस्पताल से बच्चा चोरी होने के क्रम में महिला को गिरफ्तार किया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश रहे दिवंगत इकबाल के परिवार की जमीन पर अवैध कब्जा करने पहुंचे जमीन दलालों को कुछ ही घंटे में पकड़कर जेल भेजा, कुछ को बाद में और वरीय पुलिस अधीक्षक से सीसीए भी लगवाये। अपने थाना क्षेत्र में कुछ घटनाओं पर अंकुश लगाने का काम किया। गिने चुने बचे हैं चैलेंज: कुछ घटनाएं जैसे चोरी, लूट, छीनताई पर कंट्रोल किये हैं और ब्राउन शुगर,गांजा, अफीम के अवैध धंधे में जुड़े युवाओं की तस्वीर जारी कराये हैं लेकिन इसमें और तेजी लाने की जरूरत है, साथ ही जमीन दलालों कुछ सफेदपोश अब भी सुरक्षित बचे हैं जो आगे चलकर विधि व्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं , इस पर अभी ही रोक लगाने की जरूरत है और ऐसे लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए, जो गरीबों, बेरोजगार को अवैध धंधे में संलिप्त करने के लिए मजबूर करते हैं, लेकिन ये असहय बेरोजगार इस सफेदपोश वाले से इतने डरे होते हैं कि थाना में शिकायत करने से डरते हैं, शिकायत करते हैं लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं होने से मन विचलित होता है। समाज का साथ जरुरी हैं:
इतना ही नहीं जिस लोअर बाजार थाना क्षेत्र में पुलिस निरीक्षक दयानंद पदस्थापित हैं वह काफी भीड़ भाड़ वाला और सेंसेटिव जोन माना जाता है , यहां पर खादगढ़ा बस स्टैंड से लेकर कई धार्मिक आयोजन भव्य तरीके से होते हैं, लगभग आयोजन इन्हीं के थाना क्षेत्र में होती है, सभी को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना अपने आप चैलेंज है जिसे दयानंद ने सफलतापूर्वक संपन्न कराते रहे हैं। चाहे मुहर्रम का जुलूस हो जो कर्बला चौक में पारंपरिक अस्त्र-शास्त्र के साथ हजारों लोग जुटते हैं, रामनवमी का जुलूस शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पर लोग जमा होते हैं, सरहुल पर्व सहित जन्माष्टमी,श्री दुर्गा पूजा, धरना प्रदर्शन, पुतला दहन सहित कई आयोजन इसी शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पर होती है सड़क के दूसरी तरफ कोतवाली है लेकिन ज्यादा भीड़ लोअर बाजार थाना क्षेत्र में रहती है। ईद मिलादुन्नबी का जुलूस जो नामकुम थाना क्षेत्र के कांटा टोली से हजारों लोग लोअर बाजार थाना क्षेत्र से गुजरते हैं, ऐसे तमाम पर्व को शांतिपूर्ण और विधि व्यवस्था बनाए रखते हुए संपन्न कराने के लिए थाना प्रभारी दयानंद समाजसेवियों के साथ समन्वय बनाकर सफल बनाने में अभी तक सफल रहें हैं।
इन थाना प्रभारियों को भी डीएसपी पद पर मिली प्रोन्नति

लंबे समय के बाद पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए प्रोन्नति मिल गई है। पुलिस नीरिक्षक से पुलिस उपाधीक्षक में प्रोन्नति पाने वाले मनोज कुमार बरियातू, आलोक कुमार अरगोड़ा, महेश्वर प्रसाद रंजन, सदर पश्चिमी अंचल, दयानंद लोअर बाजार, तलेश्वर प्रसाद कुशवाहा ,विजय कुमार सिंह सभी प्रोन्नति डीएसपी को आईजी रांची मनोज कौशिक, डीआईजी सह एसएसपी रांची चंदन सिन्हा, सीटी एसपी अजीत, ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने बैच लगाकर सम्मानित किया वहीं मौके पर डीएसपी शहर केवी रमन, कोतवाली डीएसपी प्रकाश सोंय उपस्थित थे।


