
नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति में बड़ा भूचाल उस वक्त आया जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल आदर्शों और सिद्धांतों से पूरी तरह भटक चुकी है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। चड्ढा ने साफ शब्दों में कहा, “मैं आम आदमी पार्टी से दूर जा रहा हूं और जनता के करीब जा रहा हूं।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ मौजूद राघव चड्ढा ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद उनके साथ हैं और सभी ने मिलकर संविधान के प्रावधानों के तहत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में विलय का निर्णय लिया है। यह बयान AAP के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी की संसदीय ताकत पर असर पड़ सकता है। चड्ढा ने अपने संबोधन में कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा और 15 साल का समय दिया, वह अब अपने मूल्यों से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP अब देशहित के बजाय निजी फायदे के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वे “गलत पार्टी में सही आदमी” हैं, और यही वजह है कि उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया। राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी के मौजूदा माहौल में वे खुद को असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने इसे ‘घुटन’ का माहौल बताते हुए कहा कि पार्टी का वर्तमान स्वरूप उसके शुरुआती विचारों और नीतियों से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, यह बदलाव उनके लिए स्वीकार करना मुश्किल था, जिससे उन्होंने खुद को अलग करने का निर्णय लिया। चड्ढा ने यह भी दावा किया कि उनके साथ AAP के कई राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में आप के 10 सांसद हैं, जिनमें से दो-तिहाई, यानी 7 हमारे साथ हैं। इनके नाम संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और अशोक कुमार मित्तल शामिल हैं। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।


