नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान पर अमेरिका–इज़राइल के हमलों के बीच भारत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश के पास पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की घरेलू मांग पूरी करने के लिए भंडार मौजूद है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास फिलहाल करीब 25 दिन की खपत के बराबर कच्चा तेल और इतने ही समय के लिए तैयार ईंधन का स्टॉक है, यानी कुल मिलाकर छह से आठ सप्ताह का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का करीब आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. ईरान के साथ हालिया संघर्ष के कारण इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है. देशभर में आपूर्ति की निगरानी के लिए 24 घंटे कार्य करने वाला नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को बताया कि भारत के पास पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) जैसे प्रमुख उत्पादों का पर्याप्त भंडार है. भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक, चौथा सबसे बड़ा शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है. पिछले वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर आपूर्ति को सुरक्षित किया है और अब कंपनियों के पास ऐसे वैकल्पिक स्रोत हैं जो होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से नहीं गुजरते. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि भले ही तेल की कमी नहीं होगी, लेकिन संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है. वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, जिससे भारत का आयात खर्च और मुद्रास्फीति बढ़ सकती है. भारत ने मार्च 2025 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में तेल आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे. यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो भारत पश्चिम अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और अमेरिका जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी को पूरा कर सकता है. सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हमेशा भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा है।

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