
आरटीआई से खुलासा के बाद क्षेत्र में तरह तरह की चर्चाएं सुर्खियों में है
प्रभात मंत्र संवाददाता
बड़कागांव: हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग परियोजना को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद, विरोध और मांगों के बीच सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त जानकारी ने परियोजना के व्यापक प्रभाव उजागर हुआ है। एनटीपीसी लिमिटेड ने आरटीआई के जवाब में आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। कि पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग परियोजना से बड़कागांव केरेडारी प्रखंड के कुल चौंतीस (34) गांव प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। यह जानकारी आरटीआई आवेदन संख्या NTPCO/R/E/26/00075 के तहत दी गई है। यह आरटीआई आवेदन बड़कागांव थाना क्षेत्र के जुगरा गांव निवासी नेपुल कुमार द्वारा 17 जनवरी 2026 को भारत सरकार के आरटीआई पोर्टल के माध्यम से दायर किया गया था। आवेदन में यह स्पष्ट रूप से पूछा गया था कि पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग परियोजना से कितने गांव प्रभावित हो रहे हैं, तथा उनकी नामवार सूची हिंदी में उपलब्ध कराई जाए। एनटीपीसी लिमिटेड के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) विकाश कुमार द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी उत्तर में बताया गया है कि इस परियोजना से कुल 34 गांव प्रभावित हैं। साथ ही गांवों की विस्तृत नामवार सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे परियोजना के सामाजिक और भौगोलिक प्रभाव का स्पष्ट आकलन संभव हो सका है। एनटीपीसी द्वारा जारी सूची के अनुसार प्रभावित गांवों में इतिज, चिरुडीह, नगाड़ी, डाडीकला, चेपाकला, आराहारा, पकरी बरवाडीह, सिंदुआरी, सोनबरसा, चुरचू, जुगरा, चेपाखुर्द, केरी, लंगातु, देवरीखुर्द, उरुब, बड़कागांव, देवरियाकला, लकुरा, बेलतु, कंडाबेर, बरियातू, जबरा, बसरिया, नवाड़ी, सिरमा, ठेंगा, बांका, बनादाग, कुसुंभा, कटकमदाग, पसाई, सिकरी और गरीकला शामिल हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के अनुसार, इन गांवों में भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास, पर्यावरणीय क्षति और आजीविका से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चिंता का विषय बने हुए हैं। कई गांवों में खेती योग्य भूमि और जंगल क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिससे ग्रामीणों की पारंपरिक जीवनशैली पर गहरा असर पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से प्रभावित गांवों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कौन-कौन से गांव परियोजना के दायरे में आते हैं। आरटीआई के माध्यम से सामने आई यह सूची अब प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण आधार बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरटीआई जवाब केवल सूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एनटीपीसी और संबंधित प्रशासन की जवाबदेही भी तय करता है। अब पुनर्वास नीति, मुआवजा वितरण, रोजगार उपलब्धता और विकास योजनाओं को इन्हीं 34 गांवों को ध्यान में रखकर लागू करना होगा। गौरतलब है कि पकरी बरवाडीह कोल माइनिंग परियोजना एनटीपीसी की प्रमुख कोयला परियोजनाओं में से एक है, जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर समय-समय पर विरोध और आंदोलन भी होते रहे हैं। आरटीआई के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आवेदक या कोई अन्य पक्ष इस सूचना से असंतुष्ट है, तो वह पत्र प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर एनटीपीसी लिमिटेड के अपीलीय पदाधिकारी रश्मि रंजन परिदा, केबिन संख्या-1, छठी मंजिल, ईओसी भवन, सेक्टर-24, नोएडा, उत्तर प्रदेश को अपील प्रस्तुत कर सकता है। कुल मिलाकर, यह आरटीआई खुलासा पकरी बरवाडीह कोल परियोजना से जुड़े प्रभावित गांवों की वास्तविक तस्वीर सामने लाता है। वहीं इस खबर से क्षेत्र में तरह तरह की चर्चाएं सुर्खियों में है।


