
वर्षों से मुआवजे का इंतजार कर रहे, किसानों में नाराजगी
हैदरनगर,पलामू: हैदरनगर प्रखंड के गोल्हना, पतरिया, रत्न विगहा, खरगड़ा, बिन्दु बिगहा, बरवाडीह, सजवन सहित आसपास के कई गांवों में नीलगाय का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। झुंड बनाकर फसलों को रौंदने वाली नीलगाय किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर रही हैं। धान, गेहूं, चना और सब्जी की फसलें सबसे अधिक प्रभावित हैं। सिद्धि सिंह, मनोज सिंह, जयप्रकाश सिंह, सुधीर सिंह, संजय सिंह सहित कई किसानों ने बताया कि नीलगायों के कारण उनकी कई बीघा फसल नष्ट हो चुकी है। किसान रातभर खेतों में पहरा देने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद फसलें सुरक्षित नहीं बच पा रही हैं।
वर्षों से लंबित है मुआवजे की मांग
किसानों ने बताया कि उन्होंने वन विभाग कार्यालय, मोहोम्मदगंज में वर्षों पहले आवेदन भी दिया था, लेकिन आज तक न तो उनके फसल की क्षति का सर्वे हुआ और न ही कोई मुआवज़ा प्राप्त हुआ। किसानों ने आरोप लगाया कि भारी नुकसान झेलने के बावजूद उन्हें सरकारी स्तर पर कोई ठोस राहत नहीं मिल रही है।
किसानों का कहना है कि वे लगातार सरकारी व्यवस्था के शिकार होते जा रहे हैं। महंगी लागत, खाद–बीज के बढ़ते दाम और नीलगाय के हमलों से कृषि करना दिन–प्रतिदिन चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वन विभाग और प्रशासन कोई सख्त कदम नहीं उठाता, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग से गांवों में गश्त बढ़ाने, नीलगाय नियंत्रण के उपाय लागू करने तथा फसल क्षति का सर्वे कर तत्काल मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि समस्या पुरानी होते हुए भी प्रशासन उदासीन है, जिससे किसानों में व्यापक नाराज़गी है।

