
रांची : लोक आस्था का महान पर्व छठ महाव्रत नहाय खाय के साथ आज शनिवार से शुरु होगा। व्रती अपने घरों में ठेकुआ बनाने से लेकर पूजन, अनुष्ठान की तैयारी शुरु कर दी है, जो आस्था और संयमित शुद्धता का व्रत माना गया है। इस व्रत की महत्ता के बारे में पंडित कुंडल तिवारी ने कहा कि संतान की प्राप्ति, सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता, छठी मईया की पूजा, आत्म शुद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के लिए आदिकाल से यह व्रत होती आ रही है। उन्होंने कहा कि मार्कण्डेय पुराण में उल्लेख है कि जब ब्रम्हा जी ने पृथ्वीलोक का निर्माण किया था तो उन्होने प्रकृति का भी निर्माण किया। इसके बाद देवी प्रकृति ने स्वयं को छह रुपों में अपने को विभाजित किया। जिसके छठे अंश को छठी मईया के रुप में माना गया है। वहीं छठी मैया को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री के रुप में जाना जाता हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार छठी मईया भुवन भास्कर सूर्य देव की बहन हैं। सूर्य देव और छठी मैया दोनों की पूजन एक साथ की जाती है। छठी मईया का कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी के रुप में छठी मईया का पूजा की जाती है।इनकी पूजा से बच्चे को स्वास्थ्य, सफलता, लंबी आयु के लिए आशीर्वाद मिलता है।उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ पूरी आस्था से व्रत शुरु होगी। 26 को खरना, 27 को संध्याकाल अर्ध्य जबकि 28 अक्टूबर को प्रातःकालीन अर्ध्य के बाद व्रतधारी पारण करेंगे।


