
पाठन के अनोखे तरीके के कारण आज भी याद किए जाते हैं मक्खन गुरु जी
@Banty Kumar
चतरा:-ऐसे तो इस दौर में कई शिक्षक शिक्षा का अलख जगाने में लगे हैं,लेकिन एक ऐसा भी दौर था जब हमारा देश अंग्रेजों का गुलाम हुआ करता था, उस दौर में भी एक शिक्षक जिन्होंने शिक्षा का अलख जगाया। उस शिक्षक का नाम मख्खन गुरु जी हैं। गुरु जी जिले के जोरी गाँव के रहने वाले थे। मख्खन गुरु जी ने सर्वप्रथम कुन्दा के बनियाडीह गाँव में अपना योगदान दिया था। सन 1947 से पूर्व ओ जोरी से जंगली रास्ते से होते हुए कुन्दा पहुँचते थे और लोगो को शिक्षा प्रदान करते थे। गुरुजी 1915 में अपनी योगदान दी और 1975 में ओ सेवानिवृत्त हो गए। इसके साथ ही मख्खन गुरु जी कुन्दा प्रखंड के शाहपुर, चुकरु, सरजामातु आदि गाँव में भी शिक्षा का अलख जगाई। इतना ही नही सेवानिवृत होने के बाद भी उन्होंने कई लोगों को शिक्षा से जोड़े रहे और शिक्ष का अलख जागते रहे। आज गुरु जी के पढ़ाए कई लोग हैं जो कई नौकरी में हैं तो कई राजनीतिक में हैं।

लोगो का प्रतिक्रिया 👇
- गुरु जी पढ़ाते थे,उस समय शिक्षक और छात्र के प्रति लगाव पिता व पुत्र का तरह होता था। आज मेरे घर में अधिकतर परिवार मख्खन गुरु जी के ही पढ़ाए हुए हैं। (लालन यादव ग्राम पिंजा)
- आज गुरु जी का ही देन है कि मैं शिक्षक के रूप में सरजामातु स्कूल में योगदान दे रहा हूँ, उस जमाने मे शिक्षा का घोर अभाव था। (गिरेंद्र यादव शिक्षक सरजामातु)
- बनियाडीह के बुजुर्गों से कहानी के रूप में सुना हूं,उस जमाने में शिक्षा के प्रति काफी मेहनत किए थे, जब इस इलाके में मूलभूत सुविधाएं नहीं थी। ( अजय कुमार वर्तमान प्रधानाध्यापक बनियाडीह)
- उस समय अंधेरे में दिया जलाने जैसा काम था, गुरु जी काफी मेहनत करते थे। (निरंजन यादव पूर्व मुखिया कुन्दा)
- मैं शिक्षा विभाग से यही मांग करता हूँ कि मख्खन गुरु जी का प्रतिमा बनियाडीह स्कूल में लगाया जाए, ताकि आने वाला शिक्षक आजादी के पहले से साधन विहीन जगह पर सबसे ज्यादा समय वहाँ के उज्ज्वल भविष्य के लिए दिए ये उनके प्रति श्रद्धांजलि होगी।(गुरुजी के पौत्र हरिओम चंद्रवंशी)
- 1952 में मख्खन गुरू जी मेरे घर आकर पढ़ाते थे उस समय लोटवा में स्कूल नहीं था , पढ़कर मैं लोटवा का सरपंच भी बना, गुरू जी के प्रेरणा से ही मैं गांव में स्कूल खुलवाया ।(श्री केदार यादव सरपंच ग्राम लोटवा प्रखंड कुंदा)
- आज मैं जो भी शिक्षा प्राप्त किया मख्खन गुरू जी का ही देन उस जमाने स्कूल नही था। (अंबिका यादव ग्राम इच्छातु कुंदा)

