रांची। डॉ. इरफान अंसारी मंत्री झारखंड सरकार (स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति व आपदा प्रबंधन विभाग) ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि जब झारखंड के दिशोम गुरु, झारखंड के निर्माता आदरणीय शिबू सोरेन जी दिल्ली के अस्पताल में भर्ती हैं और बीमार है— उसी वक्त केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी रांची आकर रातू रोड एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन कर रहे हैं।मैं डॉ. इरफान अंसारी, झारखंड सरकार का मंत्री, झारखंड की 3.5 करोड़ जनता की ओर से यह सवाल पूछता हूं क्या यही आपकी संवेदना है? क्या यही भाजपा की सोच है? जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपको पत्र लिखकर उद्घाटन को स्थगित करने का आग्रह किया, तो क्या आपको इसपर गंभीरता से विचार नहीं करना चाहिए था?
क्या गुरुजी* की गंभीर बीमारी से बढ़कर कोई कॉरिडोर का फीता काटना ज़रूरी था? मंत्री नितिन गडकरी आप हमेशा भाजपा के अन्य नेताओं से अलग माने जाते हैं आपकी सोच व्यावहारिक, आपकी छवि ज़मीन से जुड़ी रही है। लेकिन अफसोस, आज आप उन्हीं असंवेदनशील और सत्ता के भूखे नेताओं की कतार में खड़े नजर आ रहे हैं, जिन्हें न भावनाओं की कद्र है, न आदिवासी अस्मिता की।आपको झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों का सम्मान करना चाहिए था।
यह वही झारखंड है जहां की आत्मा जल, जंगल और ज़मीन से जुड़ी है।
यह वही झारखंड है जहां गुरुजी को लोग भगवान का रूप मानते हैं।* मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केवल आग्रह ही नहीं किया था, बल्कि एक संवेदनशील लोकतांत्रिक संदेश दिया था, जिसे आप पूरी तरह अनदेखा कर गए।और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि आप उन्हीं रिजेक्टेड भाजपा नेताओं के बहकावे में आ गए, जिन्हें झारखंड की जनता पहले ही नकार चुकी है।आपको ये बात समझनी चाहिए कि केंद्र सरकार ने सिर्फ पैसा दिया, परंतु उस पैसे को जमीन पर उतारकर एक भव्य कॉरिडोर में बदलने का श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार को जाता है।
तो एहसान की राजनीति मत कीजिए — हम टैक्स देते हैं, ये हमारा हक है।
यह उद्घाटन कुछ दिन बाद भी हो सकता था, पर जो अनादर आपने झारखंड की अस्मिता, गुरुजी की बीमारी और जनता की भावनाओं का किया है, वह माफ नहीं किया जा सकता।मैं आग्रह नहीं, स्पष्ट मांग करता हूं समय है इस उद्घाटन कार्यक्रम को अविलंब स्थगित करें।दिल्ली जाकर झारखंड के दिशोम गुरु से मुलाकात कर अपनी संवेदनशीलता दिखाएं।झारखंड की जनता सब देख रही है। यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं — झारखंड की अस्मिता का सवाल है।
न इतिहास माफ करेगा, न झारखंड का जनमानस।

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