रांची। कुछ गिने चुने आदिवासी संगठनों के विरोध के बावजूद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को अचानक सिरमटोली फ्लाईओवर का उद्घाटन करके सभी चौंका दिया और रांची वासियों को एक और नया फ्लाईओवर तोहफा में मिल गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फ्लाईओवर उद्घाटन के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के विकास की एक और कड़ी जोड़ी गई है । कांटा टोली फ्लाईओवर के बाद सिरम टोली फ्लाईओवर दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस फ्लाईओवर से रांची वासियों को और दूसरे प्रदेशों से भी जो आते हैं या दूसरे जिलों से भी आते हैं उन्हें भी सहूलियत मिलेगी और जाम से मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह फ्लाईओवर बाबा कार्तिक उरांव के नाम से जाना जाएगा।

2.34 किलोमीटर एलविटेड सह आरओबी है सचिव

पथ निर्माण विभाग के सचिव सुनिल कुमार ने कहा कि 5 जून 2025 को रांची के राजेंद्र चौक और मेकॉन होते हुए सिरम टोली तक फ्लाईओवर का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कर दिया और आमजनों के लिए फ्लाईओवर खोल दिया गया है। इस फ्लाईओवर के बनने सबसे अधिक फायदा उन लोगों को होगा जो हर दिन राजेंद्र चौक के पास 30 मिनट तक जाम में फंसे रहते थे। इस फ्लाईओवर की लंबाई 2.34 किलोमीटर एलविटेड सह आरओबी है। खास बात यह है कि केवल से ही रेलवे ब्रीज पर किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य सिरमटोली को मेकॉन से जोड़कर लोगों के सफर को सुगम बनाना है। इस परियोजना पर अगस्त 2022 में काम शुरू हुआ था। इसकी लागत करीब 340 करोड़ रुपए से अधिक है और इसमें खर्च बढ़ेगी। इस फ्लाईओवर की जिम्मेदारी एलएनटी कंपनी को दी गई है।

आदिवासियों ने नहीं किया विरोध :

4 जून को आदिवासी के कुछ गिने चुने संगठनों ने झारखंड बंद बुलाया था और उन्होंने रांची में सिरम टोली फ्लाईओवर का जो रैंप सरना स्थल के पास उतर रहा था इसका पूर्व जोर विरोध कुछ महीनो से कर रहे थे , लेकिन 5 जून को जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फ्लाईओवर उद्घाटन करने की जब घोषणा किये तो फ्लाईओवर के दूर-दूर तक कोई भी विरोध करने वाले आदिवासी पुरुष महिला नजर नहीं आए और शांतिपूर्ण तरीके से के साथ फ्लाईओवर का उद्घाटन किया गया।

कार्तिक उरांव के नाम से क्यों रखा गया फ्लाईओवर का नाम:

बता दे कि लंबे समय से कुछ आदिवासी संगठनों के द्वारा सिरम टोली फ्लाईओवर का विरोध किया जा रहा था। इस विरोध में दिवंगत नेता रहे कार्तिक उरांव की सुपुत्री कांग्रेस की पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने विरोध किया, इन सबका कहनाथा कि सिरमटोली के पास ऐतिहासिक सरना स्थल जो है वहां पर फूटा रैंप उतर रहा है जिससे सरना स्थल का रास्ते का चौड़ाई कम हो गया है जिस कारण से सरहुल पर्व के दौरान दिक्कतें होंगी। हालांकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट कहा था कि फ्लाईओवर का जो रैंप उतर रहा है उसमें किसी तरह की दिक्कतें नहीं आएगी , बावजूद इसके कुछ लोग राजनीतिक कर रहे थे। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी उन राजनीतिक करने वालों को एक सटीक जवाब दिया है। अब इस फ्लाईओवर का नाम आदिवासियों के नेता कहे जाने वाले बाबा कार्तिक उरांव के नाम से कर दिया गया है। बाबा कार्तिक उरांव कांग्रेस के बड़े नेता थे सांसद रहे हैं और भारतीय संसद में लोहरदगा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे भारत सरकार के उड्डयन और संचार मंत्री थे। 8 दिसंबर 1981 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया था। जिस सरना स्थल को लेकर विवाद हो रहा था वहां पर सरहुल पूजा की शुरुआत करने में उनका अहम भूमिका रही है, इसलिए इस फ्लाईओवर का निर्माण भी उन्हीं के नाम से किया जाना आदिवासियों के लिए एक सौगात है।

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