
नई दिल्ली । ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है यह त्योहार रमज़ान के महीने के खत्म होने के बाद आता है. रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और इंसानियत का संदेश देता है. इस पूरे महीने में मुसलमान रोज़ा रखते हैं, नमाज पढ़ते हैं और अल्लाह की इबादत में ज्यादा समय बिताते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमज़ान साल का नौवां महीना होता है. इस महीने में 29 या 30 दिन तक रोज़े रखे जाते हैं. आखिरी रोज़े के बाद चांद देखा जाता है. जैसे ही चांद नजर आता है, रमज़ान का महीना खत्म हो जाता है और 10वें यानी ‘शव्वाल’ महीने की शुरुआत होती है. इसी महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है. भारत में ईद का फैसला आमतौर पर सऊदी अरब और खाड़ी देशों में चांद दिखने के आधार पर होता है. साल 2026 में सऊदी अरब में 18 मार्च को ईद का चांद दिखाई देने की उम्मीद है. अगर आज वहां चांद दिख जाता है तो सऊदी अरब में 19 मार्च को ईद मनाई जाएगी. जिसके बाद भारत में यह त्योहार 20 मार्च को मनाया जा सकता है. वहीं, अगर 18 मार्च को चांद नहीं दिखता है तो अगले दिन चांद दिखाई देने के बाद सऊदी अरब में 20 मार्च और भारत में 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी. ईद-उल-फितर को लोग ‘मीठी ईद’ भी कहते हैं. इस दिन सुबह सबसे पहले मस्जिदों में ईद की खास नमाज अदा की जाती है. इसके बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. घरों में खीर और सेवइयां जैसी मीठी चीजें बनाई जाती हैं. लोग भाईचारे के साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं।
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