रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गए. गुरुवार को चंपाई सोरेन के पैतृक गांव जमशेदपुर के नजदीक सरायकेला-खरसावां जिले के जिलंगगोड़ा गांव में अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झारखंड के विधायक, सांसद और क्षेत्र में चंपाई सोरेन के समर्थक और रिश्तेदार शामिल हुए. वीर सोरेन का 24 फरवरी 2026 मंगलवार को मनाली में निधन हो गया था. वे अपने दोस्तों के साथ मनाली घूमने गए थे. मनाली पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ 22 फरवरी को मनाली पहुंचे थे. वे सभी सिमसा के हिमालयन सैलेट होम स्टे में ठहरे थे. 23 फरवरी को उन्होंने सोलंग और सेथन क्षेत्र का भ्रमण किया था. वीर सोरेन 24 फरवरी की दोपहर करीब 12:30 बजे घूमकर होम स्टे स्थित कमरे में आए, तो उन्होंने सिर में तेज दर्द की शिकायत की. दोस्तों ने ऑनलाइन ब्लिंकिट से दवा मंगवाकर दी, जिसके बाद वे सो गए. दोपहर करीब 2:30 बजे दोस्तों ने कमरे में गिरने की आवाज सुनी. जब वे कमरे में गए, तो वीर सोरेन फर्श पर अचेत पड़े थे. आनन-फानन में उन्हें प्राइवेट गाड़ी से मनाली सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वीर सोरेन को जब अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब उनके मुंह से झाग निकलना शुरू हो गया था. मनाली सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. जमशेदपुर के जिलंगगोड़ा गांव में दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही वीर सोरेन का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा गांव गमगीन हो गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण, शुभचिंतक और समर्थक अंतिम दर्शन के लिए जमा हो गए. सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. वीर सोरेन के अंतिम संस्कार से पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के जिलंगगोड़ा स्थित आवास पर पहुंचकर उनके पोते को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उन्होंने चंपाई सोरेन और परिजनों से बातचीत कर उन्हें ढांढ़स बंधाई।

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