
रांची। झारखंड में लंबे समय से टल रहे नगर निकाय चुनाव अब होने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के सभी 48 नगर निकायों में चुनाव कराने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण निर्धारण पर पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा को भी हरी झंडी दे दी गई है। राज्य सरकार ने झारखंड नगरपालिका (निर्वाचन एवं चुनाव याचिका) नियमावली 2012 में संशोधन करते हुए यह स्पष्ट किया है कि महापौर और अध्यक्ष पदों पर अधिकतम 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का पालन किया जाएगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग (BC-I व BC-II) को इसी सीमा के भीतर आरक्षण मिलेगा। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्गों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में तय किया गया है। राज्य आयोग की अनुशंसा के अनुसार, नगर निगमों में BC-I के लिए 30.28%, BC-II के लिए 14.15% यानी कुल 44.43% आरक्षण तय हुआ है। नगर परिषदों में BC-I के लिए 39.94%, BC-II के लिए 11.70% यानी कुल 51.64% और नगर पंचायतों में BC-I के लिए 41.20%, BC-II के लिए 9.90% यानी कुल 51.10% आरक्षण तय किया गया है। इस निर्णय के बाद झारखंड में करीब पांच साल से लंबित निकाय चुनावों की राह खुल गई है। राज्य चुनाव आयोग अब अधिसूचना जारी करने की तैयारी में जुट जाएगा। सरकार का मानना है कि आरक्षण तय हो जाने से चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की कानूनी बाधा नहीं रहेगी। अब झारखंड के 48 निकायों में स्थानीय निकाय चुनाव की हलचल एक बार फिर शुरू होने जा रही है।


