धनबाद । पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह सहित चार लोगों की जघन्य हत्या में उनके चचेरे भाई व झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह सहित सभी 10 को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। एमपी-एमएलए के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी के न्यायालय ने बुधवार को खचाखच भरी अदालत में धनबाद के सबसे चर्चित हत्याकांड में अपना फैसला सुनाया। 21 मार्च 2017 की शाम सात बजे सरायढेला के स्टील गेट में नीरज सिंह, उनके पीए अशोक यादव, बॉडीगार्ड मुन्ना तिवारी और ड्राइवर घल्टू महतो को गोलियों से भून दिया गया था। मामले में नीरज सिंह के अनुज अभिषेक सिंह की लिखित शिकायत पर संजीव सिंह, उनके भाई सिद्धार्थ गौतम उर्फ मनीष सिंह, जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, झरिया के गया सिंह (फिलहाल) और महंत पांडेय को नामजद और अन्य अज्ञात को आरोपी बनाया गया था। जांच के बाद पुलिस ने इस कांड में 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था। चार्जशीट में मनीष सिंह, गया सिंह और महंत पांडेय का नाम नहीं था। इनके खिलाफ पुलिस को साक्ष्य नहीं मिले। कोर्ट ने सुल्तानपुर के कुर्बान अली उर्फ सोनू, बलिया के चंदन सिंह उर्फ रोहित उर्फ सतीश व सुल्तानपुर के शिबू उर्फ सागर सिंह (तीनों शूटर) के अलावा शूटरों को धनबाद बुलाने के आरोपी यूपी सुल्तानपुर लंभुआ के पंकज सिंह, समस्तीपुर के डबलू मिश्रा, उसके दोस्त झरिया निवासी विनोद सिंह, सरायढेला के रणवीर धनंजय सिंह उर्फ धनजी, झरिया माडा कॉलोनी निवासी रंजय सिंह के भाई संजय सिंह और जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया। जजमेंट के मद्देनजर चंदन, शिबू और विनोद को जेल से कोर्ट में पेश किया गया था। वहीं अन्य आरोपी सशरीर न्यायालय में हाजिर थे। सजा के ऐलान के साथ जमानत पर छूटे सभी आरोपी मुक्त हो गए। केस से जुड़े लोगों को ही मिली कोर्ट में इंट्री फैसले के मद्देनजर धनबाद कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सरकारी और निजी सुरक्षा गार्ड से पूरा कोर्ट परिसर पटा हुआ था। फैसला सुनाने के दौरान केस से जुड़े लोगों को ही कोर्ट रूम में इंट्री दी गई। कोर्ट में आरोपियों के साथ उनके वकील उपस्थित थे। आठ साल पांच महीने बाद आया फैसला नीरज हत्याकांड के आठ साल पांच महीने और छह दिन बाद न्यायालय में अपना अहम फैसला सुनाया। कोर्ट में 408 तारीखें पड़ीं। 37 लोगों ने अपनी गवाही दी थी। कई तकनीकी साक्ष्य भी न्यायालय में पेश किए गए थे। आदित्य राज की गवाही को न्यायालय ने निकाल दिया।

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