
खाट पर झूलता सिस्टम,गर्भवती को चारपाई पर लेकर तीन किलोमीटर चले परिजन
@Banty Kumar
कुंदा (चतरा): आज़ादी के अमृत काल में भी झारखंड के कई ग्रामीण इलाके आज तक बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।इसका ताज़ा उदाहरण कुंदा प्रखंड के सिकीदाग पंचायत अंतर्गत लुकुईया गांव(टोला बुटकुईया)में देखने को मिला,जहां प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को परिजनों ने खाट पर लादकर लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया,जहां खड़ी ममता वाहन से उसे अस्पताल ले जाया गया।
गांव तक पक्की सड़क नहीं होने और टेढ़ापना नदी पर आज तक पुल नहीं बनने के कारण हर बारिश में यह इलाका टापू में तब्दील हो जाता है। जानकारी के अनुसार अरविंद गंझू की पत्नी भीखी देवी को जब प्रसव पीड़ा हुई,तो परिजनों ने ममता वाहन को कॉल किया लेकिन ममता वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।
परिजनों को गर्भवती महिला को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ी।
ग्रामीण मरनी देवी,कोशिला देवी, पुनिता देवी,संगीता देवी,सोनी देवी, गंगोत्री देवी,फुला देवी,लखन गंझु, मनसू गंझु,सरयू गंझु,दशरथ गंझु, कारू गंझु समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि बरसात के समय गांव पूरी तरह से अलग-थलग हो जाता है। राशन-पानी की व्यवस्था किसी तरह कर लेते हैं,लेकिन बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है।किसी भी आपात स्थिति में नदी को पार करना एक जोखिम भरा कार्य बन जाता है।

क्या कहती हैं पंचायत के मुखिया?
सिकीदाग पंचायत की मुखिया अनीता देवी ने कहा कि उन्होंने कई बार इस समस्या को लेकर प्रखंड व जिला प्रशासन को अवगत कराया है। एक बार उम्मीद जगी थी जब प्रशासन द्वारा नदी पर पुल निर्माण हेतु नापी करवाई गई,लेकिन उसके बाद विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई।यह स्पष्ट रूप से विभागीय उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बारिश के दिनों में गांव के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी शिक्षा बाधित होती है।
जरूरी सवाल: कब तक उपेक्षित रहेंगे ग्रामीण इलाके?
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक ग्रामीण इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा?सड़क, पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।

