
परवेज़ कुरैशी
रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने देश के 12 राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनाव की 26 सीटों पर चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। आयोग के मुताबिक इन सीटों के लिए मतदान 18 जून को कराया जाएगा। चुनावी कार्यक्रम जारी होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।राज्यसभा की जिन सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। खासकर उन राज्यों में जहां विधानसभा में संख्या बल को लेकर मुकाबला दिलचस्प है, वहां राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद 18 जून को मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन मतगणना भी होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
राज्यसभा चुनाव में संबंधित राज्यों के विधायक मतदान करते हैं। ऐसे में विधानसभा में जिस पार्टी या गठबंधन का संख्या बल अधिक होता है, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना मजबूत मानी जाती है। इन चुनावों में उन राज्यों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी जहां राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।
झारखंड में दो सीटों पर होगा मतदान
झारखंड राज्य सभा के 6 सीटों में फिलहाल अभी दो सीट खाली होने जा रही है एक तो दिसंबर गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का है जो खाली हो रहा है तो वहीं दूसरे सीट भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त हो रहा है इन दोनों सीटों पर अगर देखा जाए तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास बहुमत है और वह राजा और कांग्रेस को मिलाकर चाहेगी तो दोनों सीटों पर कब्जा कर लेगी वहीं कांग्रेस यदि चाहे तो वह राज्यसभा में अपना उम्मीदवार भेज सकती है लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का समर्थन बहुत जरूरी है तो वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों सेट झारखंड मुक्ति मोर्चा को देगी यह भी देखने वाली बात होगी भाजपा के पास बहुमत नहीं है वह चाह कर भी 28 विधायक जुटा नहीं पाएंगे इसके लिए कांग्रेस को तोड़ना होगा बताते चले कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को 56 विधायकों का समर्थन है जिसमें 34 झामुमो के अपने विधायक हैं। राजद के के चार और कांग्रेस के 16 विधायक हैं। वहीं भाकपा माले दो विधायक।
भाजपा गठबंधन के मात्र 24 ही विधायक हैं। भाजपा 21, आजसू 01, जदयू 01, लोजपा 01 और जेलकेम किसके साथ जायेगी इसपर ही नजर सबकी रहेगी।
परिमल नथवाणी पहली पसंद
झारखंड से दो राज्यसभा सीटों पर कौन जाएंगे यह अभी तक तस्वीर सामने नहीं आई है , लेकिन कयास लगाई जा रही है कि पूर्व में भी राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं , तो इस बार भी उन पर निगाहें टिकी हुई है, अगर ऐसा होता है तो भाजपा और झामुमो का पूरा समर्थन परिमल नाथवानी को रहेगी । वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा दूसरी सीट पर झामुमो के किसी को भेज सकते हैं , जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजलि सोरेन का नाम पहले आ रहा है। दुमका विधायक और छोटे भाई बसंत सोरेन के धर्मपत्नी पर भी विचार चल रहा है , जहां तक गांडेय की विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन की बात है तो उसे राज्यसभा में नहीं भेजा जाएगा, ऐसा इसलिए कि मुख्यमंत्री को फिर झारखंड विधानसभा के गांडेय में उप चुनाव की तैयारी करनी पड़ेगी और हेमंत सोरेन नहीं चाहेंगे कि उनका जो अपनी सीट है उसके लिए मेहनत करना पड़े। वहीं झामुमो के बुरे वक्त के साथियों पर भी हेमंत सोरेन का कलेजा पसीज सकता है जैसे पूर्व में डा महुआ माजी को राज्यसभा सांसद बनाया। इसी तरह पार्टी के महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य जिन्होंने अपना समय दिशुम गुरु शिबू सोरेन की सेवा में गवां दी, वहीं पार्टी प्रवक्ता विनोद पाण्डेय, अभिषेक प्रसाद पिंटू या इनके परिवार से कोई हो सकतें हैं।
भाजपा कर सकती है समझौता
वहीं भाजपा चाहेगी कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को अपने साथ सटा सकती है, इसके लिए भाजपा हेमंत सोरेन की बड़ी भाभी और दिशुम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी बहू जो भाजपा में शामिल हो गई है दिवंगत विधायक दुर्गा सोरेन की धर्मपत्नी सीता सोरेन पर भी विचार कर रही है। हालांकि अभी तस्वीर साफ नहीं है, अब देखना होगा कि कांग्रेस के धीरज साहू लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संपर्क बढ़ा रहे हैं , अपने लिए या अपने परिवार के लिए ये जानना दिलचस्प हो। ऐसे में क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धीरज को कुछ मदद कर सकेंगे। पूरा समीकरण जो है दो दिन बाद पता चलेगा, कि राज्यसभा में किसकी चलेगी और कौन होंगे दो राज्यसभा सांसद और किस पार्टी का मिलेगा समर्थन।
मुसलमान पर नहीं है समिकरण
जब भी राज्यसभा चुनाव की बात होती है तो मुसलमान को मौका मिले इस पर भी बातें होती हैं, यही कारण है कि शुरुआत से कांग्रेस के जामताड़ा विधायक सह स्वास्थ्य मंत्री डा इरफान अंसारी अपने पिता और पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को राज्यसभा भेजने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बेहतर संबंध बनाकर चलते रहे हैं, फिलहाल कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी के पास भी पहुंचे हुए हैं। वहीं विधायक गण की संख्या नहीं रहने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शाहजादा अनवर को चुनाव मैदान में भेजने वाली कांग्रेस इस बार विधायकों की संख्या आसानी से जुटाई जा सकती है तो शाहजादा अनवर के नाम पर मुंह में गुड़ दबा रखा है और चेप है, दूसरी ओर पूर्व सांसद सुबोधकांत साहय भी राज्यसभा जाने के लिए सगुफा छोड़ रहे हैं। बस दो दिन इंतज़ार करे और राज्यसभा उम्मीदवार कौन होंगे सब सामने होगा।

