गिरिडीह । झारखंड के गिरिडीह जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मनरेगा के एक कनीय अभियंता (जेई) को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच भी इसकी चर्चा तेज हो गई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधनवार प्रखंड में तैनात मनरेगा के कनीय अभियंता अंकुश कुमार ने एक लाभुक से योजना के भुगतान के एवज में 5000 रुपये रिश्वत की मांग की थी. यह राशि मापी चढ़ाने के नाम पर मांगी जा रही थी, जो मनरेगा योजनाओं में भुगतान की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होता है. शनिवार को एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी जेई को 5000 रुपये लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया. गिरफ्तारी के दौरान टीम ने मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की. बताया जा रहा है कि जब कनीय अभियंता ने लाभुक से रिश्वत की मांग की, तो उसने इसकी सूचना एसीबी को दी. शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और आरोपों का सत्यापन किया. सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. पूरी योजना के तहत टीम ने लाभुक को निर्देश दिया और जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम ली, उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. इस घटना ने एक बार फिर मनरेगा योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गरीबों और जरूरतमंदों के लिए चलाई जा रही इस योजना में अगर अधिकारी ही रिश्वत मांगेंगे, तो इसका सीधा असर लाभुकों पर पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है. ऐसे में एसीबी की यह कार्रवाई एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है. एसीबी की टीम आरोपी कनीय अभियंता से पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार में कोई और शामिल तो नहीं है।

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