नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और ऑटो ड्राइवर्स बढ़ती डीजल, पेट्रोल और गैस कीमतों के खिलाफ 21 से 23 मई तक तीन दिन का बड़ा आंदोलन करे रहे हैं. यूनियन की मांग है कि टैक्सी और ऑटो के किराए में बढ़ोतरी की जाए, क्योंकि पिछले कई वर्षों से किराया नहीं बढ़ाया गया है, जबकि सीएनजी और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं. चालकों का कहना है कि करीब 15 साल पहले जो किराया तय किया गया था, वही आज भी लागू है. इस बीच महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन उनकी आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. यूनियन नेताओं का कहना है कि अब मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना बेहद मुश्किल हो गया है. इससे पहले 19 मई को चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर, जिन्हें लोग ‘अन्ना’ के नाम से भी जानते हैं, ने सरकार पर टैक्सी चालकों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि टैक्सी चालक कई सालों से सरकार से लगातार बातचीत कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया. अनुज राठौर ने आईएएनएस से कहा था, “करीब 15 साल पहले दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत जो किराया तय किया गया था, उसमें आज तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. मजबूरी में हमें 21, 22 और 23 मई को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा है. उन्होंने बताया कि यह हड़ताल पूरे दिल्ली-एनसीआर में होगी और बड़ी संख्या में टैक्सी चालक इसमें शामिल होंगे. यूनियन की मुख्य मांग किराए में संशोधन है ताकि चालक बढ़ती महंगाई के बीच अपना परिवार चला सकें. अनुज राठौर ने यह भी कहा कि यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत ने भी इस पर निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद किराया नहीं बढ़ाया गया. उन्होंने कहा, “2015 में सरकार ने टैक्सी स्कीम बनाई थी और अब 2026 आ गया है. हर कुछ दिनों में सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन किराया वहीं का वहीं है. उन्होंने दावा किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े चालक भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं. यूनियन ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि गरीब ड्राइवरों की स्थिति को समझते हुए जल्द किराया बढ़ाया जाए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन चला सकें।

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