सुकून और शांति की राह पर लौट चुका था गेंद्रा,अमन-चैन से जी रहे थे ग्रामीण

@Banty Kumar

कुंदा (चतरा): प्रखंड मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित गेंद्रा गांव जो दो-तीन दशक पूर्व उग्रवादियों और माओवादियों का शरणस्थली माना जाता था एक बार फिर दहशत के साए में आ गया है। चतरा और पलामू जिले की सीमांत ईलाका होने के कारण यह इलाका कभी नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।
हालांकि लगातार पुलिसिया दबिश और अभियान के बाद उग्रवाद की नींव धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई और गांव में अमन-चैन बहाल हो गया था।ग्रामीण अपने खेती-बाड़ी और रोजमर्रा के कामों में शांति से जुट गए थे।लेकिन लंबे अरसे बाद आपसी रंजिश में हुए खूनी संघर्ष और गोलीकांड ने गांव की शांति भंग कर दी है।इस घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल व्याप्त है।शाम ढलते ही गलियां सुनसान हो जाती हैं और लोग अपने घरों में सिमटने को मजबूर हैं।जहां कभी शांति और सौहार्द का माहौल था वहां अब गोलियों की तड़तड़ाहट और वर्चस्व की लड़ाई ने ग्रामीणों का सुकून छीन लिया है।दो दशक पहले जिस गेंद्रा गांव में दिन के उजाले में भी नक्सलियों की धमक सुनाई देती थी वह गांव हाल के वर्षों में पूरी तरह सामान्य जीवन की ओर लौट चुका था।ग्रामीणों का कहना है कि वे शांति से जीवनयापन कर रहे थे,लेकिन इस घटना ने एक बार फिर डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
वहीं कुंदा थाना प्रभारी प्रिंस कुमार सिंह लगातार गांव का दौरा कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *