बरहरवा/साहिबगंज। जिले के बरहरवा थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की हकीकत अब किसी से छिपी नहीं रह गई है। बंगालीपाड़ा में बंद घर को निशाना बनाकर लाखों रुपये के जेवरात और नगदी चोरी की घटना ने न केवल पुलिस की निष्क्रियता को उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं या फिर उन्हें कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस घर में चोरी हुई, वह बरहरवा थाना से सड़क मार्ग से महज करीब 450 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि सीधी दूरी 250 मीटर से भी कम है। यानी अपराधियों ने थाना के ठीक नाक के नीचे इस वारदात को अंजाम दिया और आराम से निकल भी गए। घटना भी किसी सुनसान आधी रात में नहीं, बल्कि रात 9 से 11 बजे के बीच हुई, जब आमतौर पर पुलिस गश्ती का दावा सबसे ज्यादा किया जाता है। बंगालीपाड़ा निवासी धव्जेन कुमार घोष (49) के घर में 29 अप्रैल की रात यह वारदात हुई। वे अपने परिवार के साथ घर में ताला लगाकर पास ही एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। डेढ़ घंटे बाद लौटने पर मुख्य दरवाजा अंदर से बंद मिला, जिससे संदेह और गहरा गया। पीछे के रास्ते से अंदर जाने पर घर का नजारा पूरी तरह तबाह मिला, तीनों कमरों में सामान बिखरा पड़ा था और अलमारियां खंगाली जा चुकी थीं। चोरों ने खिड़की का ग्रिल तोड़कर घर में प्रवेश किया और बेहद सुनियोजित तरीके से चोरी को अंजाम दिया। सोने-चांदी के बहुमूल्य गहनों जिनमें शाका, पोला, मंगटीका, पांच अंगूठियां, पांच जोड़ी झुमके, हीरे के आभूषण और मंगलसूत्र शामिल हैं, के साथ करीब 1.10 लाख रुपये नकद और हजारों रुपये के सिक्के भी गायब हैं। कुल मिलाकर लगभग 7 लाख रुपये के जेवरात और 1.13 लाख रुपये नगद की चोरी हुई है। घटना की सूचना पर बरहरवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और खानापूर्ति करते हुए जांच शुरू करने की बात कही। थाना प्रभारी सुमित कुमार सिंह ने जल्द खुलासा और गिरफ्तारी का भरोसा जरूर दिलाया है, लेकिन क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बीच यह भरोसा अब लोगों को खोखला और रटा-रटाया बयान ही प्रतीत होता है। दरअसल, बरहरवा थाना क्षेत्र में पिछले कई महीनों से चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस की गश्ती व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है। थाना के इतने करीब, व्यस्त समय में हुई यह घटना पुलिस की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर थाना से चंद कदम की दूरी पर भी लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो फिर बाकी इलाके की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। स्थानीय लोगों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि पुलिस की प्राथमिकता सुरक्षा नहीं, बल्कि सड़कों पर वसूली बन गई है। हाईवे एवं मुख्य सड़कों पर ट्रक और ट्रैक्टर चालकों से कथित उगाही में व्यस्त पुलिस से यह उम्मीद करना कि वह मोहल्लों में गश्त कर अपराध रोक पाएगी, लोगों को अब भ्रम से ज्यादा कुछ नहीं लगता। यही वजह है कि अपराधी बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझी नजर आती है। बरहरवा में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों का पुलिस पर भरोसा लगातार टूट रहा है। यह घटना न केवल एक परिवार की जमा-पूंजी की लूट है, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक करारा तमाचा भी है। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस इस घटना को भी महज एक और केस बनाकर फाइलों में दबा देगी, या फिर वाकई कोई ठोस कार्रवाई कर यह साबित करेगी कि कानून का डर अभी जिंदा है, क्योंकि फिलहाल तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

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